प्रयोगशाला में मेंढक

एक जीवविज्ञानी मेंढ़कों के व्यवहार का अध्ययन कर रहा था। वह अपनी प्रयोगशाला में एक मेंढ़क लाया, उसे फर्श पर रखा और बोला – "चलो कूदो !" मेंढ़क उछला और कमरे के दूसरे कोने में पहुंच गया। वैज्ञानिक ने दूरी नापकर अपनी नोटबुक में लिखा – "मेंढ़क चार टांगों के साथ आठ फीट तक उछलता है।"
फिर उसने मेंढ़क की अगली दो टांगें काट दी और बोला – "चलो कूदो, चलो !" मेंढ़क अपने स्थान से उचटकर थोड़ी दूर पर जा गिरा। वैज्ञानिक ने अपनी नोटबुक में लिखा – "मेंढ़क दो टांगों के साथ तीन फीट तक उछलता है।"
इसके बाद वैज्ञानिक ने मेंढ़क की पीछे की भी दोनों टांगे काट दीं और मेंढ़क से बोला – "चलो कूदो!"
मेंढ़क अपनी जगह पड़ा था। वैज्ञानिक ने फिर कहा – "कूदो! कूदो! चलो कूदो!" पर मेंढ़क टस से मस नहीं हुआ।
वैज्ञानिक ने बार बार आदेश दिया पर मेंढ़क जैसा पड़ा था वैसा ही पड़ा रहा ।
वैज्ञानिक ने अपनी नोटबुक में अंतिम निष्कर्ष लिखा – "चारों टांगें काटने के बाद मेंढ़क बहरा हो जाता है।"

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